माँ | एक औरत की दर्द भरी कहानी | A heart touching Story | Stories Ke Sath
नींद अपनी भुला कर सुलाया हमको
आंसू अपने गिरा कर हंसाया हमको
दर्द कभी न देना उस खुदा की तस्वीर को
खुदा भी कहता है माँ जिसको…
इन पंक्तियो का मतलब आज हम इस विडीओ मैं जानेंगे..
चलो आओ सुनते है.
बोहोत सालो बाद शांति और संजय को एक लड़का हुआ. उसका नाम दोनो ने आदित्य रखा
आदित्य शांति और संजय के लिए उनकी पूरी दुनिया था. उसे जब भी कोई चीज़ चाइए होती थी शांति उसे वो वो चीज़ लाके देती थी .
हँसता खेलता परिवार था इनका. शांति मन ही मन मन मैं बोलती थी के नज़र ना लगे हमपे.
जब आदित्य ३ साल का था तभी उसके पिता संजय की आचानक मृतु हो गई.
शांति बेवस हो गई थी और घरी की पूरी जीमेदारी उसके कंधे पे आगाई. शांति नौकरी कर कर के अपने घर का पेट पल रही थी पर आदित्य के पर्वेरिश मैं किसी भी चीज़ की कमी नहीं आने दी.
ऐसे करते करते १ साल बीत गया. शांति का घर अब नोर्मल हो रहा था. धीरे धीरे घर में ख़ुशियाँ आने लगी. शांति आदित्य के साथ अपना गाव छोड़ के शहर आगाई. वहाँ शांति को एक चोटिसि nukari मिल गई थी. और सुभे शाम वो अपने काम में ही रहती थी.
एक दिन आदित्य अपने घर के बहेर खेल रहा था . खेलते खेलते आदित्य रोड पे चला गया. वह से एक कार तेज़ी से आदित्य के और बढ़ रही थी, जैसे ही वो कार आदित्य के नज़दीक पोहोचि तब तक शांति बीच मैं आगाई और शांति का ऐक्सिडेंट हो गया.
वह के लोगों ने शांति को हॉस्पिटल मैं भारती करवा दिया. जब शांति होश मैं आई तब सबसे पहले उसने आदित्य के बारे मैं पूछा.
और अपने लड़के को सही सलामत देख शांति के जान मैं जान आइ. तभी डॉक्टर ने शांति को बताया के उस ऐक्सिडेंट मैं तुम्हारा एक पेर कट गया पर तुम चाओं हम तुम्हें दूसरा आर्टिफ़िशल पेर लगा सकते है, but उसमय बोहोत खरचा आ सकता है और ये opration हमें अगले २४ घंटे के अंदर ही करना होगा वरना हम तुम्हारा पैर नहीं बचा पाएँगे . शांति ने डॉक्टर से सुबह तक का समय माँगा.
अब शांति के पास दो रास्ते थे.
१) अपनी सेविंग से अपना पेर ठीक करे
या
२) यही पैसा वो आदित्य के शिक्षा पे लगाए.
सुभह तक शांति इस बरेमै सोचती रहती है.
दूसरे दिन जब डाक्टर ने शांति को अपना निर्णय पूछा ये सुनके डाक्टर के होश उड़ गए थे.
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शांति ने डॉक्टर को operation करने से मना कर दिया. डॉक्टर ने शांति को बोहोत समजाया पर शांति ने ठान लिया था के मेरे पेर से जाड़ा आदित्य की शिक्षा important है. मेरे फ़्यूचर से जाड़ा मूँजें उसके फ़्यूचर की परवाह है. ये बोल के शांति वह से निकल जाति है.
और कुछ ही सालो मैं और पैसा जमा कर के वो आदित्य को एक आछे स्कूल मै डालती है.
अपने घर और माँ के परिस्तिथि से अनजान आदित्य अपने मै मस्त था. स्कूल में उसने अपने बोहोत से दोस्त बना लिए थे . वो उनके साथ खेलना कूदना पदाई लिखाई सब करता था. अद्तिया पदाई में हमेशा अव्वल आता था. अपने सब दोस्तों से हर चीज़ मय अव्वल भी आता था. और आदित्य की आची ग्रोथ देख के उसके बोहोत से दोस्त उससे जलाने लगे . अद्तिया के ऊपेर कुछ छिड़ने के लिए नहीं मिला तो उसके दोस्त आदित्य को लंगड़ी माँ का लड़का के नाम से छिड़ने लगे.
पहले तो आदित्य ने उस बात को ignor किया बुत दिन ब दिन ये बड़ते ही जा raha था . आदतिया को स्कूल में लंगड़ी माँ का लड़का के नाम से चिद्याया जाने लगा. आदित्य ने स्कूल जाने से माना कर दिया . जब भी शांति उससे समजती थी तो वो उल्टा जवाब देके बात करता था . और इस सपका जीमेदार अपनी माँ को मानता था . वो अपनी माँ को स्कूल चेंज करने बोल देता है और उससे दूर बोर्डिंग मै डालने का आग्रह करता है.
शांति उससे समजताई है । ये सब कुछ ही दिन की बात है बेटा सब ठीक हो जाएगा. वो अपनी माँ को बोलता है. सब ठीक होता ager मेरे पापा होते. ना तुम कभी स्कूल आती और ना कभी ये सब होता.
शांति के आँखों में आंसू आजाते है. और उन्ही आंसुओं को पोछते हुए पूछती है , तू ही बता में क्या कारु .
तभी आदित्य उससे बोलता है . Muze बस दूसरे स्कूल मै भेज दो. ताकि वाह कोई आपको देख ना पाए .
शांति उससे गले लगा लेती है और बोलती है. तुज़े जो चाइए वो ले ले बस कभी मजपे नफ़रत मत करना. ये बोल कि शांति उससे अपने से दूर पड़ने के लिए भेज देती है .
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समय बिताता जाता है . आदित्य अपनी लाइफ़ मय सक्सेस पे success पता है . हर जगह आदतिया अव्वल ही आता है .
पहले पेहेल साल मई एक बार वो अपनी माँ को ख़त लिखता रहेता tha . पर जैसे जैसे वो अपनी लाइफ़ मय तरकी करता जाता है वैसे वैसे अपन माँ को खाते लिखना बैंड कर देता है . आदित्य को ख़त भेजे हुए भी सालो हुए रहेते है .
आदित्य से कोई भी ख़त सालो से नहीं मिलने के कारण शांति बेचेन होती है . उससे बस आदित्य की सलामती जानी होती है और इसीलए वो यह वह पता कर के का घर का पता कर लेती है . और वो आद्तिया से मिलने निकल पड़ती है.
पर वह टक कैसे पोहोचे ये शांति को पता नहीं होता है . आदित्य के लास्ट लेटर के adress को ध्यान में रख कर वो आदित्य को धुँड़ने निकलती है और कई डीनो तक वह भटकने के बाद शांति आद्तिया के घर के पास पोहोच जाती है. आदित्य का इतना बड़ा घर देख उसके आँखों से आंसू आ jate है.
आदित्य को मिलने की ख़ुशी जितनी शांति को होती है उतनी आदित्य को चिड़. अपनी माँ को देख आदतिया बोखला जाता है. उसे वो bolta है . यहा क्यू आइ है तू. तुज़े पैसे चाइए तो में भेज देता हूँ बस तू यहा से जा.
शांति उसे बोलती है . मैं बस तुज़े देखने आइ थी मूँजें पैसे वैसे कुछ नहीं चाइए बस तेरे साथ थोदास टाइम बिता लू .
आदित्य उससे बोलता है - मेरी आज एक बोहोत बड़ी मीटिंग है मैं नहीं रुक सकता तू चली जा यहा se और वैसे भी तू यहा रहेगी तो लोग १० बातें करेंगे. जिस चीज़ कि वजह से मैंने अपना past छोड़ा था वो सब मज़े अभी वापिस नहीं चाइए .
ये बोलके वो अपनी माँ को वही आकेला चोद मीटिंगमैंचला जाता है. और शांति रोते हुए अपने घरों को निकल जाति है.
इस सब से आदित्य का मूड खरब हो जाता है और मान ही मन में सोचने लगता है . आज का दिन ही खरब है. अगर ये मीटिंग ख़राब गई तो उसका करण होगी वो बुदिया.
ये सोचते सोचते जिनके साथ उनकी मीटिंग रहती है वो आजाते है.
Meeting काफ़ी आचि जाती है. Dono एक दूसरे लाइफ़ के बारे में question तक पूछना चालू करते है.
तभी आदित्य उनको पूछता है..
आपके लाइफ़ का सबसे बड़ा regrate क्या है.
तभी वो किलेंट आदित्य को जवाब देता है.
मेरे लाइफ़ का सबसे बड़ा regrate ये २५ साल पुराना है . जब में किसी काम से दूसरे सिटी मय गए था और जल्द बाज़ी मैं मेरे हाथ से एक औरतactident हो गया था जो अपने बचे को बचते बचते खुद बीच में आगाई .एंड जब मय वापिस हॉस्पिटल गया था तब मज़े पता चला के वो वाह से जा चुके है पर उसका एक पैर गवा चुकी थी.
जब मैंने डॉक्टर से पूछा क्या हम उनका दूसरा पैर नहीं लगा सकते तब डॉक्टर बोले उनके जड़ा पैसा नहीं था और बो औरत बोली
मेरे पेर से जाड़ा आदित्य की शिक्षा important है. मेरे फ़्यूचर से जाड़ा मूँजें उसके फ़्यूचर की परवाह है.
ये सुन के आदतिया हेरन हो ज़ाटा है. वो मिस्टर singhanaya को एक तस्वीर दिखता है और पूछता है. क्या यही है वो?
मिस्टर सिंघनाया ज़ोर से चिल्लाते है. हा यही है वो . पेर तुम्हारे पास इनका फ़ोटो कैसे आया.
तभी आदित्य उनको बोलता है. ये मेरी माँ है.
मिस्टर singhanaya उससे बोलते है. दुनिया के सबसे लकी इंस्सन हो जो ये तुम्हरि माँ है.
उसी मोमेंट में उसे रीलीसे होता है के
जिस वाहज से आज तक में अपनी माँ को दूधकर्ता रहा उस सब की वजह में ही हूँ. उस दिन मेरी माँ ager मेरी जान नहीं बचाहती तो आज ये जो कुछ भी मेरा है वो कुछ नहीं होता.
आदित्य वह से उठ के अपनी माँ को धुँड़ने जाता है. वो यह वह देखता है पर उसे शांति कही नहीं मिलती. कुछ समय बाद आदित्य को उसकी माँ बस स्टाप पे रोते हुए दिखती है. वो उसके पास जाता है और उससे बोलता है.
उसे धुंद के उसकी माफ़ी माँगता है. और उससे आपने घर लेके जाता है.
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